दिल्ली पुलिस को केंद्र सरकार के बजाय दिल्ली सरकार के अधीन किए जाने की मांग को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आंदोलन किए जाने को उनकी राजनीति चमकाने का एक हथकंडा माना जा रहा है। हालांकि, केजरीवाल
इसे आजादी की दूसरी लड़ाई बता रहे हैं। वह कह रहे हैं कि यह आंदोलन
दिल्ली पुलिस की ज्यादती, निष्क्रियता और घूसखोरी के शिकार हर नागरिक के
लिए हैं। लेकिन, एक्सपर्ट्स उनके इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं। कई समर्थक
भी इस तरह के आंदोलन को गलत बता कर उनसे बिदकते लग रहे हैं।
केजरीवाल के ताजा आंदोलन पर क्या है राय
'अगर दिल्ली पुलिस को केजरीवाल की सरकार के मातहत कर दिया जाए तो किसी
दिन वे पूरी फोर्स को ही सस्पेंड कर देंगे। पुलिस वालों का तबादला करते
रहना कोई समाधान नहीं है। क्या वे अवैध निर्माण को रोक सकते हैं। सस्पेंड
करने का मुद्दा सम्मान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस केंद्र
सरकार के तहत काफी आजाद महसूस करती है। अगर इसे दिल्ली सरकार के तहत लाया
जाएगा तो विधायक दखल देने लगेंगे। मौजूदा ढांचा कामयाब है। केंद्र से फंड
वगैरह भी अच्छा मिलता है।'

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